मध्यप्रदेश की जनजातीय विरासत अत्यंत समृद्ध: मुर्मू
03-Aug-2023 05:38 PM 1234652
भोपाल, 03 अगस्त (संवाददाता) राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि मध्यप्रदेश की जनजातीय विरासत अत्यंत समृद्ध है। यहां सर्वाधिक जनजातियां निवास करती है। हमारे सामूहिक प्रयास होने चाहिए कि हम अपनी संस्कृति, लोकाचार, रीति-रिवाज और प्राकृतिक परिवेश को सुरक्षित रखते हुए जनजातीय समुदाय के आधुनिक विकास में भागीदार बनें। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू आज यहां रवीन्द्र भवन में ‘उत्कर्ष और उन्मेष’ उत्सव के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहीं थीं। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी और साहित्य अकादमी द्वारा संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से भोपाल में पहली बार 3 से 5 अगस्त तक भारत की लोक एवं जनजाति अभिव्यक्तियों के राष्ट्रीय उत्सव ‘उत्कर्ष" एवं "उन्मेष’ का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रपति ने दीप प्रज्ज्वलन कर उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। श्रीमती मुर्मू ने कहा कि नव उन्मेष से संयुक्त प्रतिभाएं भारत को समग्र विकास के उत्कर्ष तक ले जायें। ‘उन्मेष’ और ‘उत्कर्ष’ जैसे आयोजन इस दिशा में तर्क संगत भी हैं और भाव संगत भी। ऐसा आयोजन एक सशक्त ‘कल्चरल ईको सिस्टम’ का निर्माण करेगा। मध्यप्रदेश शासन का इसमें सक्रिय सहयोग सराहनीय है। श्रीमती मुर्मू ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी सर्वाधिक यात्राएं मध्यप्रदेश में हुयीं हैं। वे आज पाँचवीं बार मध्यप्रदेश की यात्रा पर आईं हैं। वे मध्यप्रदेश के 8 करोड़ निवासियों को यहाँ उनके आत्मीय स्वागत के लिए धन्यवाद देती हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व हमारे देश की चिंतन धारा में सदैव रहे है। प्राचीनकाल से हमारी परंपरा कहती है ‘यत्र विश्व भवति एकनीडम्’। पूरा विश्व एक परिवार है। इस बार भारत जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और उसका आदर्श वाक्य ‘वन अर्थ, वन फेमिली एवं वन फ्यूचर’ इसी भावना की अभिव्यक्ति है। यही भावना महा कवि जयशंकर प्रसाद की कविता में प्रतिबिंबित होती है ‘अरूण यह मधुमय देश हमारा, जहां पहुँच अंजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’। श्रीमती मुर्मू ने कहा कि साहित्य का सत्य हमेशा इतिहास के सत्य ऊपर होता है। कवि वर रविन्द्रनाथ टैगोर और महर्षि नारद की रचनाओं में यह स्पष्ट है। साहित्य मानवता का आइना है, इसे बचाता है और आगे बढ़ाता भी है। साहित्य और कला संवेदनशीलता, करूणा और मनुष्यता को बचाती है। साहित्य और कला को समर्पित यह आयोजन सार्थक और सराहनीय है। उन्होंने कहा कि विश्व आज गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। विभिन्न संस्कृतियों में समन्वय और आपसी समझ विकसित करने में साहित्य और कला का महत्वपूर्ण योगदान है। साहित्य वैश्विक समुदाय को शक्ति प्रदान करता है। साहित्य की कालातीत श्रेष्ठता से हर व्यक्ति परिचित है। विलियम शेक्सपियर की अमर कृतियां आज भी इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य आपस में जुड़ता भी और जोड़ता भी है। श्रीमती मुर्मू ने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की भाषाएं और बोलियाँ उनकी है। विभिन्न भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद भारतीय साहित्य को और समृद्ध करेगा। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल विहारी वाजपेयी का संथाली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रयास अत्यंत सराहनीय था। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्मेष का अर्थ आँखों का खुलना और फूल का खिलना है। यह प्रज्ञा का प्रकाश और जागरण है। 19वीं शताब्दी में नव जागरण की धाराएँ 20वीं सदीं के पूर्वार्द्ध तक प्रवहमान रहीं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वधीनता और पुनर्जागरण के आदर्शों को साहित्यकारों ने बखूबी अभिव्यक्त किया। उस समय का साहित्य देशभक्ति की भावना की अमर अभिव्यक्ति है। उस समय के साहित्य ने मातृभूमि को देवत्व प्रदान किया। भारत का हर पत्थर शालिगराम बना। बंकिमचन्द्र चटर्जी, सुब्रमण्यम् जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं का जनमानस पर गहरा प्रभाव रहा। श्रीमती मुर्मू ने कहा कि ‘उत्कर्ष’ जनजातीय समाज की उन्नति का उत्सव है। राष्ट्रपति ने कहा कि जिस दिन भारत का जनजातीय समाज उन्नत हो जाएगा, उस दिन भारत विश्व में विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो जाएगा। भारत में 700 से अधिक जनजातीय समुदाय हैं और इससे लगभग दो गुना उनकी भाषाएँ हैं। आज जब भारत का अमृत काल चल रहा है, तो हमारा यह दायित्व है कि जनजातीय भाषा और संस्कृति जीवित और विकसित होकर रहे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू के भोपाल आगमन पर उनका स्वागत और अभिनंदन किया और कहा कि भारत की हृदय स्थली मध्यप्रदेश में विभिन्न संस्कृतियाँ, 21 प्रतिशत जनजातीय आबादी के साथ अनेकता में एकता के सूत्र से बनी माला के मनकों के समान एक साथ, एकजुट होकर रह रही हैं। राष्ट्रपति के आगमन से उन्मेष और उत्कर्ष के आयोजन की गरिमा बढ़ी है, समस्त प्रदेशवासी गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध भोपाल में दोनों कार्यक्रमों का आयोजन, साहित्य एवं कला-प्रेमियों के लिए निश्चित रूप से परम आनंद का विषय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि 15 देशों के 550 से अधिक विभिन्न भाषाओं के रचनाकारों की 75 से अधिक कार्यक्रमों में सहभागिता का यह उत्सव, कला और संस्कृति की सभी परंपराओं के सामंजस्य का उत्सव बनेगा। राज्यपाल ने कहा कि उन्मेष के दौरान जनजातीय कवि-लेखक सम्मेलन, ‘भारत एट सेवन्टी’ पर कविता पाठ और मध्यप्रदेश के गीत के सत्रों का आयोजन किया जा रहा है।...////...
© 2025 - All Rights Reserved - timespage | Hosted by SysNano Infotech | Version Yellow Loop 24.12.01 | Structured Data Test | ^